Category Archives: कविता

सच ! ये कुछ और नहीं, हमारी जमा पूंजी है !!

सेठ, साहूकार, अमीर, व्यापारी, नेता, अफसर इनकी ही जय जयकार है, मेरा भारत महान ! … प्यार, दर्द, जख्म, आंसू, यादें, गम, नफ़रत माँगने की हदें मत तोड़ो, लो हम खुद आ गए ! … मैं जब तक मैं रहा, … Continue reading

Posted in कविता | Leave a comment

… सो गए थे, ओढ़ कर, चादर हवाओं की !!

सर्द रातें बढ़ रही थीं शीत भी गिरने लगी थी जर्द पत्तों को बिछा कर हमने बिछौना कर लिया था बदन थक कर चूर चूर और आँखें भी निढाल थीं आसमां में दूधिया चाँदनी चहूँ ओर मद्दम मद्दम रौशनी बिखरी … Continue reading

Posted in कविता | Leave a comment

… दुपट्टा … आँखें … चाहत … !!

… दुपट्टा … तुम्हारा दुपट्टा, हवा के झौंके संग, सरकने लगा नीचे, और नीचे, मेरी निगाह, थम सी गई मैं देखता रहा, कुछ ललक थी, तुम्हें देखने की सच, मैं देखता रहा, सरकता, तुम्हारा दुपट्टा ! … आँखें … तुम्हारी … Continue reading

Posted in कविता | Leave a comment

गाँधी के वतन में, अब कोई गाँधी नहीं है !

तेरी खामोशियों का, क्या मतलब समझें तुझे उम्मीद है, या इंतजार है । … वक्त गुजरे, तो गुजर जाये तेरे आने तक, इंतजार रहेगा हमको । … आसमां तक रोशनी चाहते क्यों हो घरों के अंधेरे तो दूर हों पहले … Continue reading

Posted in कविता | Leave a comment

प्रेम से नहीं, दरिंदों को लातों से कुचला जाए !

मुफलिसी, दुश्मनी, गम, अंधेरे, सताते रहते हैं जब भी मिलते हैं, अकड़ के मिलते हैं, जैसे कर्जदार हूँ मैं ! … बेवफाई के दौर में, वफादार कहाँ मिलते हैं ‘उदय’ एक आस थी, टूट गई, जब आज वो बेवफा निकले … Continue reading

Posted in कविता | Leave a comment

उफ़ ! क्या करें, मौत भी इम्तिहां ले रही है !!

हमदर्दी की बातें, मौकापरस्ती का आलम है जिधर देखो उधर, फरेब ही फरेब है ‘उदय’ ! ….. जिन्दगी, ठिकाने, दीपक, उजाले, जमीं, आसमां सच ! गिले–शिकवे भुलाकर, चलो मिलकर संवारें ! ….. उफ़ ! मुहब्बत झूठी निकल गई सच ! … Continue reading

Posted in कविता | Leave a comment

न भी चाहेंगे, फिर भी किसी हाथ से जल जायेंगे !!

खटमल, काक्रोच, मच्छर, दीमक, मकडी, बिच्छू हिस्से-बंटवारे में लगे हैं, लोकतंत्र असहाय हुआ है ! ….. छत चूह रही है, गरीब भीग रहे हैं अमीरों ने बरसांती की दुकां खोली है ! ….. दीमक, फफूंद, जाले, बढ़ रहे हैं ‘उदय’ … Continue reading

Posted in कविता | Leave a comment