सच ! गुलामी में भी, ठाठ छन रही है !!

पॉलिसी, प्रीमियम, इंश्योरेंश, सब कुछ करा लिया
फिर क्लैम के लिए, मेरे सीने पे नस्तर चला दिया !
…..
छोड़ दिया कोई गम नहीं, अपना बनाया तो सही
तोड़ते फिरते हैं दिलों को, उन्हें कोई अफसोस नहीं !
…..
चलो फिर आज रेत का एक घरौंदा बना लें
कुछ देर ही सही, हम खुशियों को जगह दें !
…..
दे दे कर सलामी, खुश हो रहे हैं लोग
सच ! गुलामी में भी, ठाठ छन रही है !
…..
सच !मिट्टी, रेत के घरौंदे हम बनाते रहे
और उन्हें बारिश की बूंदों से बचाते रहे !
…..
तेरी
दुआओं ने सलामत रक्खा है मुझको
सच ! एक एक अदा का, कर्जदार हूँ मैं !
…..
चलो आज की सब इत्मिनान से सलाम कर लें
सफ़र में हमें, हर रोज दोचार पहर मिलना है !
…..
सच ! हम तो उसी दिन हो गए थे फना
जिस रोज तुमने हमें देख मुस्काया था !
…..
तेरी आँखों ने कहा, कुछ चाव से
सोचे बिना ही हम तेरे संग हो लिए !
…..
ठीक
है, जाओ, पर याद रखनाउदय
घर में कोई, टकटकी लगाए बैठा है !
…..
प्रेम
, विश्वास, समर्पण, खुशियों की बुनियाद हैंउदय
सच ! जिसको भी छेड़ोगे, मायूसी ही हाथ आयेगी !
…..
चाहत, कशिश, लम्हें और हम
चलो
कहीं बैठ के बातें कर लें !
…..
जब तक हमने पत्थर उछाले नहीं थेउदय
कैसे कह देते आसमां में सुराख हमने किये थे !

Advertisements
This entry was posted in कविता. Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s