उफ़ ! कहीं ऐसा न हो, वहां भी शैतानों की हुकूमत हो !!

मैं जब से डूबा हूँ, तेरी यादों के समुन्दर में यारा
कोई बताये भूल-भुलैय्या है, या जंतर-मंतर !
…..
‘उदय’ जाने, कौन बैठा है वहां, हिसाब-किताब की दुकां खोले
उफ़ ! कहीं ऐसा न हो, वहां भी शैतानों की हुकूमत हो !
…..
ऐसी चाहत किस काम की ‘उदय’
जिसे चाहें,उसे मालूम ही न हो !
…..
तुम्हें चाहना, चाहते रहना, मेरी मोहब्बत है
गर कोई खुदगर्जी कहे, तो उस पर लानत है !
…..
दुष्ट कह लो, क्या करें मजबूर हैं
नेता सभी, सत्ता के नशे में चूर हैं !
…..
उफ़ ! क्या सितम है सर्द मौसम का ‘उदय’
कुडियां सभी, बदन ढकने को हुई मजबूर हैं !
…..
चहूँ ओर है आलम मौकापरस्ती का
संजीदगी की बातें हजम नहीं होती !
…..
अब क्या करें, सरकार है चलानी तो पड़ेगी ही
कोई बताये, बिना घोटालों के चलती है क्या !
…..
ईमान, जिस्म, रंग, खुशबू, बाजार हो गए
कुछ बेचने वाले, तो कुछ खरीददार हो गए !
…..
कुछ बन गए अमीर, ईमान बेचकर
क्या हुआ जो हम गुमनाम हो गए !
…..
क्यों हम फ़िदा हुए, अंदाज पे तेरे
अब अपने वजूद को, ढूँढते हैं हम !
…..
खुशियों की चाह में, खिड़की तो खोल दी
अब कब तक रहें खड़े, तेरे इंतज़ार में !
…..
मन, आँखें, रात, हैं तेरे इंतज़ार में
अब शर्म न करो, घूंघट को डाल कर !
…..
सुबह, शाम, दिन, रात, इंतज़ार किया
अब क्या कहें, तेरा वादा, वादा ही रहा !
…..
तेरे वादे, सफ़र, और इंतज़ार मेरा
चलो कोई बात नहीं, इन्तेहा ही सही !
…..
हाँ खबर है हमको, कडा पहरा है तुझ पे
कम से कम आँखों से, सलाम कह देते !
…..
क्या गजब अंदाज-ए-मोहब्बत है ‘उदय’
उफ़ ! चाहते भी रहे, और खामोश भी रहे !
…..

Advertisements
This entry was posted in कविता. Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s