पियो-खाओ जनता की, खाओ-पियो सरकार है !

तेरी मुस्कराहट की चाह में, टूटकर बिखरने को आतुर हैं बहुत
एकउदयहै, तेरी मुस्कान पर उसका मिजाज समझ नहीं आता !
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लोकतंत्र है, शिकायत करें, तो भला अब किससे करें
दो बार की, इस अर्ज में अब वे दोनों भी शामिल हैं !
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कहाँ फुर्सत रही अब गरीबों की, हुक्मरानों कोउदय
मजहबी बातें, मजहबी नुस्खे, अब चुनावी मुद्दे हुए हैं !
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तुम्हें बसा कर रक्खा था हमने, यादों में रात भर
बेवजह इल्जाम लगाते रहे हम, चाँद पर रात भर !
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भईय्या बड़े बड़े घोटाले, और बड़े बड़े भ्रष्टाचार हैं
पियोखाओ जनता की, खाओपियो सरकार है !
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