किसी ने बताया, लोकतंत्र है, जन्म से गूंगा-बहरा है !

नया साल आ गया है, यार कैसे चुपचाप बैठे हो
डरो मत, चलो करें, मिलकर एक और नया घोटाला !
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खेल नया कुछ नहीं, बस शब्दों का करतब है यहाँ
शब्दों की जादूगरी तो है, पर जादूगर नहीं हूँ मैं !
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चलने दो भ्रष्टाचार, अपने देश की जनता है, कोई फर्क नहीं
थोड़ा-बहुत चिल्लायेगी, फिर खुद के दुख-दर्द में उलझ जायेगी !
…..
टी.वी.वालों ने तंग कर रक्खा है, अच्छा सुनते नहीं हैं
बुरा बोलो तो कुछ का कुछ समझ, ब्रेकिंग बना देते हैं !
…..
हम तो बेवजह ही उसे, बुरा-भला कह रहे थे
किसी ने बताया, लोकतंत्र है, जन्म से गूंगा-बहरा है !

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