सच ! ये लोकतंत्र है !!

बेईमानी या इमानदारी ! वाह
बेईमानी की उम्मीद
कितनी, सिर्फ उतनी ही
जितना बेईमान का दायरा है
क्यों, क्योंकि, दायरे से बाहर
वो भी बेईमानी में
मुश्किल, कठिन, असंभव सा है !

किन्तु इमानदारी का सवाल
तो फिर सोचना ही क्या
कोई हद, मर्यादा, दायरा
शायद ! नहीं, क्यों
क्योंकि सवाल इमानदारी का है
इमानदारी का सवालदिल
और बेईमानी कामनसे है !

एक सरकारी कुर्सी पर
बैठा अफसर ! बेईमानी में
कुर्सी के दायरे को
बेखौफ छू रहा है
और जब सवाल इमानदारी
तोदिलको टटोलने
के लिए भी तैयार नहीं !

नेता, मंत्री ! उफ्फ
कोई हद नहीं, क्यों
इन्हें इमानदारी की फुर्सत
चर्चा ! कोई मतलब नहीं
सिर्फ बेईमानी ! एक मन्त्र
वाह ! क्या नज़ारे हैं
सच ! ये लोकतंत्र है !!

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