….. नया साल है चलो कुछ नया ठोक दें !!

कल तक हमें पता नहीं था, कि हम कहाँ हैं
चलो आज का दिन खुशनुमा है, हम यहाँ हैं !
………..
सर्द हवाएं और है कडकडाती ठंड
गुनगुनी धूप संग बिखरा सवेरा !
………..
न जाने, कौन है, जो मेरी राहों को तकता है
गुजरता हूँ, गुजर जाता हूँ, पर मेरी आहट से छिपता है !
………..
‘उदय’ क्या सोचते हो, नया साल है चलो कुछ नया ठोक दें
कोई तो होगा मायूस, चलो उसे ही नव वर्ष शुभा-शुभ बोल दें !!

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