चलो बन जाएं आज, हम सब ‘सांता क्लाज’ !!

चलो बन जाएं आज, हम सब ‘सांता क्लाज’
मिलकर बांटे खुशी, न सोचें कौन अपना, कौन पराया है !
……………………..

तेरी खामोशियों से, कोई शिकायत नहीं है हमको
कम से कम वादा करने, मुकर जाने का डर जो नहीं है !
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हर पहर इबादत को, हाथ उठते नहीं हमारे
‘खुदा’ जानता है, सुबह-शाम के मजदूर हैं हम !
………….
है आलम अमीरी का, फिर भी फटे कपडे
चलो कोई बात नहीं, हम गरीब ही अच्छे हैं !
………….
हर रोज, बदला बदला सा, नजर आता है चेहरा तुम्हारा
चलो आज, खुशनसीबी है, जो मुस्कराहट भी नजर आई !
………….
गरीबी, लूट, मंहगाई, दिन-व-दिन बढ़ रही है
क्या फर्क, बढ़ने दो, हमें तो सरकार की चिंता है !
………….

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