झूठी महात्वाकांक्षा : नौकरानियों के डगमगाते मन !

यार शिल्पी कुछ दिनों से मन में कुछ अजीब सा हो रहा हैक्या हुआ बोलना आशाअब क्या बोलूँ, बताने में शर्म भी लग रही हैयार तू भी मेरे से शर्माएगी तो फिर जीवन में करेगी क्यामेरा मतलब वैसे शर्माने से नहीं हैतो फिरमैं जिस घर में काम करती हूँ मालिक की नजर मुझ पर लट्टू हो रही है जबकि मालकिन बिलकुल ऐश्वर्या राय जैसी सुन्दर हैसारे मर्द एक जैसे होते हैं सुन्दरतावुन्दरता का कोई लेनादेना नहींमतलबमतलब बोले तो सीधासीधा है जहां नई औरत दिखी बस लार टपकना शुरू, बोले तो एकिच्च कामआजकल तो हम काम वाली बाईयों पर भी खूब मेहरवान होने लगे हैं

हाँ देखा नहीं वो फिल्मस्टार कैसे काम वाली बाई के रेप में अन्दर हो गया थाहाँ यार सच बोलती तू, यार ये बता अपुन लोगों में उन्हें क्या दिखता है जो खूबसूरत बीबीयों को छोड़ हम पर लार टपकाने लगते हैंये बता पिछले महीने तेरा खसम पड़ोस की औरत संग मुंह काला किया था वो क्या तेरे से ज्यादा खूबसूरत है, बता बतायाद मत दिला वो दिन, जी तो चाह रहा था कि साले को हंसिये से काट डालूँ, पर बच्चों का मुंह देख कर रह गईवोइच्च हाल मेरे खसम का भी है, अब क्या करें मजबूरी है

यार शिल्पी मेरा मन डोल रहा हैबोले तोलगता है अपना सारा जीवन ऐसे ही काम करते गुजर जाएगा, क्यों ना कुछ नया सोचा करा जाएबोले तोवो एक पिक्चर देखेला था अपुन दोनों, जिसमें सेठ का दिल नौकरानी पे गया था और चोरी चोरी सेठ सेठानी से ज्यादा नौकरानी को प्यार करता था, क्या ठाठवाठ हो गए थे उसकेहाँ याद है, कुछ उसी तरह का मन डोल रहा है क्यायार ठीक ठीक वैसा तो नहीं, पर मन हिलडुल रहा है

बोल तो सही रही है अपुन लोग तो जगह जगह काम करते रहे हैं और देख भी रहे हैं कि हर घर में कुछकुछ कालापीला तो हो ही रहा हैबात तो सच बोलती तू , साले खसम लोग भी तो अब भरोसे के नहीं रहे फिर क्यों अपुन लोगसती सावित्रीबने बैठे हैंपर एक बात और मन में उमड़घुमड़ रही हैबता क्याजब ये साले खूबसूरत बीबी के नहीं हो रहे वे अपुन लोग के कैसे हो सकते हैं और कितने दिन के लिएबात में दम है, शायद एकदो दिन … जब तक चढ़ने का मौक़ा नहीं मिल जाता, जहां चढ़ने को मिला फिर अपनी “कुत्ते” वाली औकात पर आ जायेंगे, इसकी-उसकी सूंघते … फिर क्या करें, कोई तो उपाय होगा … उपाय – वुपाय कुछ नहीं, बस दो-चार बार चढ़ने-उतरने का जोखिम उठाना पडेगा, हो सकता है इस जोखिम से कोई सच्चा दिलदार आशिक मिल जाए और अपनी भी ऐश हो जाए … जोखिम, वो भी चढ़ने-उतरने का … क्या फर्क पड़ता है शायद अपनी भी टीना और शिल्पा की तरह निकल पड़े !!!

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