मौन हो गया, कौन हो गया, देश हमारा मौन हो गया !

रूह, लम्हें, सांसे और जुनून
संग-संग हों तो जन्नतें हैं !
……………..
खामोशियों के बंद दरवाजों पे दस्तक देने का डर नहीं
पर तेरी खामोशियों में न जाने कौन सा तूफां ठहरा है !
……………..
न कभी गुमनाम थे, न कभी गुमनाम होंगे
ये हमारे हौसले हैं, जो हर घड़ी दो-चार होंगे !
…………….
उसको आने का, मुझको जाने का
कुछ तो था गम, भूल जाने का !
……………..
नंगों की नंगाई, लुच्चों की लुच्चाई, टुच्चों की टुच्चाई पे
मौन हो गया, कौन हो गया, देश हमारा मौन हो गया !
……………..
दिलों में खंजरों की खनखनाहट है
फिर कैसे खुदा, दिल में जगह लेंगे !

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