तू हंसकर जब खफा होती है !

कायर साथियों के हिम्मत की दाद तो देनी होगी
डरते भी हैं, और खंजर-नश्तर साथ भी रखते हैं !
………………..
चले जाना मुझे तुम छोड़कर यूं
पर यादों में सफ़र लंबा लिखा है !
………………..
कब तक बदलेंगी सोखियाँ देखें
हम चेहरे पे नजरें, टिकाये बैठे हैं !
………………..
तुमको चहरे पे गुमां है शायद
पर हम नज़रों पे यकीं रखते हैं !
………………..
तू हंसकर जब खफा होती है
कसम ‘उदय’ की सबसे जुदा होती है !
………………..
क्यों मैं बसता हूँ इर्द-गिर्द तेरे, चंद लब्जों में कैसे बयां कर दूं
साथ जन्मों जन्मों का है, एक पल में कैसे खुदको जुदा कर लूं !

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