परिवर्तन

आज नहीं, तो कल
होगा “परिवर्तन”

चहूं ओर फ़ैले होंगे पुष्प
और मंद-मंद पुष्पों की खुशबू
उमड रहे होंगे भंवरे
तितलियां भी होंगी
और होगी चिडियों की चूं-चूं
चहूं ओर फ़ैली होगी
रंगों की बौछार

आज नहीं, तो कल
होगा “परिवर्तन”

न कोई होगा हिन्दु-मुस्लिम
न होगा कोई सिक्ख-ईसाई
सब के मन “मंदिर” होंगे
और सब होंगे “राम-रहीम”

न कोई होगा भेद-भाव
न होगी कोई जात-पात
सब का धर्म, कर्म होगा
और सब होंगे “कर्मवीर”

आज नहीं, तो कल
होगा “परिवर्तन”।

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